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Read 3rd Part of Novel Ganga Aur Dev

शिवालय

एक लाख बीस हजार आबादी वाले इस छोटे से गोशाला शहर में…..एक शिवालय था। उमा-महेश का शिवालय। यह एक प्रसिद्व शिव मन्दिर था, जिसका निर्माण पाण्डवो ने करवाया था, ऐसा विदित है।
प्राचीन महाभारत काल मे जब कौरवों ने धोखे से चैपड़ के खेल में पाण्डवों को हरा दिया और उन्हें हस्तिनापुर से खदेड़ दिया, तो पाण्डव भारत मे विभिन्न स्थानों की यात्रा करते करते गोशाला पहुॅचे।

दन्त कथाओं के अनुसार कौरवों ने पाण्डवों को कई वर्षों का अज्ञातवास दिया। यदि पाण्डवों की अज्ञातवास के दौरान पहचान हो जाती तो उनका वनवास कई साल और बढ़ जाता। अज्ञातवास के दौरान कौरव पाण्डवों को पहचान न सकें, इस उद्वेश्य के लिए उन्होने इस प्राचीन उमा महेश शिवालय की रचना की। और तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया।

शिव की कृपा हुई। और अज्ञातवास के दौरान कौरव पाण्डवों को पहचान न सके। कौरवों को अपना राज्य पुनः प्राप्त हो गया।

जल्द ही शिवलिंग का महत्व समस्त गोशाला वासी जान गये। और शिवलिंग पर आकर प्रतिदिन पूजा अर्चना करने लगे । शिव ने भी अपने भक्तांे को निराश नही किया। उनके विभिन्न प्रकार के दुखों को हरना आरम्भ कर दिया। इस प्रकार ये शिवालय बना गोशाला का पवित्रतम स्थान और गोशाला का पहचान चिन्ह ।

देव भी शिवालय पहुॅचा। शिव से बीएड के एग्जाम मे अच्छी रैंक माॅगने।

— व —

सुबह के आठ बजे। अच्छा दिन। खिली 2 धूप चारांे ओर।
सुबह से ही शिवालय मे भक्तो का आना जाना शुरू हो गया था। मन्दिर के परिसर मे फूल वालो, धार्मिक किताबों व पूजन सामग्री बेचने वालों ने अपनी 2 दुकानें खोल ली थी। धक्का-मुक्की शुरू हो चुकी थी शिव के दर्शन के लिए।

ढम! ढम! ढम! ढम!……नगाडे़ वाले लगातार नगाडे़ बजा रहे थे। जो भक्त शिवालय मे प्रवेश करता था, वो द्वार पर लगे बड़े से कई कुन्तल भारी पीतल के घण्टे की रस्सी खींचकर बडा सा घंटा बजाता था….इसलिए टन्न!! टन्न!! की ध्वनि कुछ-2 देर में इस घन्टे से उत्पन्न होती थी और सुनायी पडती थी पूरे गोशाला में। मंैने भी सुना।
सम्पूर्ण मन्दिर एक विशाल चबूतरे पर बना था जिस पर जाने के लिए सौ से ज्यादा सीढ़ियाॅ चढ़नी पड़ती थी। अब वर्तमान समय में गोशाला के अमीर डाॅक्टरों, व्यापारियों, व नेताओं से चन्दा देकर प्राचीन शिवालय को बिल्कुल आज के दौर का नया, चमचमाता मन्दिर बना दिया था। विशाल चबूतरे पर सफेद संगमरमर राजस्थान से मंगवाकर लगवा दिया था। मन्दिर की दीवारों को पीओपी करवाकर सफेद व लाल रंग के मिश्रण से रंगवा दिया गया था। मन्दिर की साफ सफाई पोछा लगाने, पानी से धोने के लिए चार लोगों को भी नियुक्त कर दिया गया था। इतना ही नही कुछ व्यापारी तो शिवालय के मुख्य कश्र में एसी भी लगाना चाहते थे। पर उन्हे इसकी अनुमति नहीं मिली।

देव ने सौ सीढ़ियाॅ चढ़ी और संगमरमर के चबूतरे पर पहुॅचा। फिर देव ने मुख्य कक्ष में प्रवेश किया। विशाल शिवलिंग अपने नियत स्थान पर विराजमान थी…

देव ने बड़ी श्रद्वा से अपने दोनो हाथ जोड़े….
हे शिव! मैंने बीएड का इक्जाम ठीक दो महीने पहले दिया था। आज रिजल्ट आने वाला है देव ने शिव से कहा मन ही मन

अगर अच्छी रैंक न आई, तो माॅ क्या सोचेगी कहेगी यह लडका खुद को कितना होशियार बताता है, फिर भी इस आसान से इक्जाम मे अच्छी रैंक नही ला पाया। इसलिए मेरी इज्जत बचाओ और मुझे एक अच्छी सी रैंक दिलाओ‘‘
पूरे एक सौ एक रू का प्रसाद चढाउॅगा!! पक्का बिल्कुल पक्का… कोई बेईमानी नहीं! कोई चीटिंग नहीं!! देव ने शिव से कहा

— व —

शिव की कृपा हुई। देव को बीएड में अच्छी रैंक आई।

15 दिन बाद

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