मस्तिष्क के बारे में रोचक तथ्य

By | March 25, 2020

मस्तिष्क के तीन हिस्से और सक्रिय ध्यान – एक वैज्ञानिक शोध-

हमारे तीन मस्तिष्क होते है – पहले को रेप्टाइल ब्रेन कहते है ,यह सबसे आदम मस्तिष्क है और इसका संबंध सेक्स ,निद्रा ,भोजन ,आक्रमण इत्यादि से है | देह मन रूप में इसका केंद्र उदर में है |

दूसरा मस्तिष्क है मेमेलियन ब्रेन जिसे भावनात्मक मस्तिष्क कहा जाता है इसका केंद्र ह्रदय में है और तीसरा मस्तिष्क मेंटल या ह्यूमन ब्रेन कहलाता है | और यह देह का वह भाग है जहाँ से हमे बाहा जगत की काल्पनिक सच्चाई दिखाई देती है | इस काल्पनिक ,मानसिक जगत में हम स्वप्नचित्र ,स्वर्ग और नरक की रचना कर लेते है | यह मस्तिष्क मेमेलियन और रेप्टेलियन ब्रेन को नियंत्रित करता है और उन्हें एक सीमा में बांधे रखता है | भावनाएं और मूल वृतिया इसके नियंत्रण में रहती है |

वैज्ञानिको की खोज है की यह तीनो मस्तिष्क एक साथ कार्य नहीं करते वास्तविकता यह है की यह एक खंडित शरीर विज्ञान का मन है यह एक सामान्य स्थिति है लेकिन स्वस्थ नहीं | इसका अर्थ यह हुआ है की हमारी देह और मन भी बंटे –बंटे है | ध्यान करने से हम सामान्य हो जाते है और मस्तिष्क पूर्णता से कार्य करता है तो इसके विभिन्न भाग एक लयबध्दता में होते है |

ओशो की नव मानव की दृष्टी में देह और मन में कुछ नहीं बंटा –बंटा न होगा क्योंकि वह चेतना की इकाई की तरह कार्य करेगा | इसका अर्थ यह हुआ की उस मानव में यही तीनो मस्तिष्क पूर्णता से कार्य करेंगे ,एक दुसरे के विरोध में नहीं |

सक्रिय ध्यान देह ,मन ,ह्रदय और तीनो मस्तिष्को को संगठित करने की सर्वाधिक वैज्ञानिक विधि है ध्यान का पहला चरण :- अग्नि श्वसन , रेप्टेलियन ब्रेन पर कार्य करता है और हम उच्चतर मस्तिष्क के नियंत्रण से मुक्त हो पाते है | इससे भावो और मूल वृतिया को स्वतंत्रता मिलती है |

ध्यान का दूसरा चरण :- रेचन , मेमेलियन ब्रेन पर कार्य करता है जिससे भाव ग्रंथिया पिघलती है और आप पुरानी दबी मानसिक स्मृतियों एवं आघातों से मुक्त होते है |
तीसरे चरण में जब आप कूदते हुए काम केंद्र पर हूँ ध्वनि की चोट करते है तो ऊर्जा का उर्धगमन होने से केंदित होने का भाव गहराता है और आप अधिक संगठित अनुभव करते है | इस प्रकिया एक ऐसा बिंदु आता है की जब आप कूद रहे होते है और इसमें प्रयास कोई नहीं होता |

एक्यूप्रेशर चिकित्सा के अनुसार पाँव के तल में कुछ ऐसे ऊर्जा केन्द्र है जो बहुत महत्वपूर्ण है | जब हम तीसरे चरण में पावो पर कूदते है तब तलो पर जो संघात होता है उससे हमारे मस्तिष्क पर एक स्वस्थ प्रभाव पड़ता है | यही कारण है की एडी सहित पावो के तलो पर कूदने का आग्रह है |

चौथे चरण में :- जब आप अचानक रुककर थम जाते है तो आपके शरीर की सम्पूर्ण ऊर्जा बिना किसी अवरोध के प्रवाहित होती है और आप स्वयं को संगठित पाते है अब आप बंटे बंटे नहीं है और एक तरलता का आभास होता है यह वह स्थिति है जहाँ से आप स्वयं का अनुभव कर सकते है |

 31 total views,  1 views today

Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *