Write For UsPublish Your Blogs For FREE!

Essay on Afforestation (Hindi ) और कितने वृक्षों का बलिदान करना होगा ???

आज हम आपको जिस विषय के बारे में बता रहे है , वह सर्वथा आपके लिए ही नहीं अपितु सभी के लिए है | यदि आपको  पर्यावरण की समस्या के विविध आयामों के बारे में ज्ञान नहीं होगा तो आने वाले समय में आप उसका सामना किस प्रकार करोगे ?

हिन्दू धर्म के मान्यताओ के आधार पर मनुष्य जब मृत्यु को प्राप्त होता है तब उसकी अंतिम क्रिया में लकड़ी की आवश्यकता होती है | आप कहोगे यह क्या नहीं बात है , यह तो प्राचीनकाल से चली आ रही प्रथा है | हाँ , यह सच है  मगर आपको मालुम है की एक मृत देह को जलाने के लिए अनुमानत  ३२० किलो लकड़ी लगती है , यानी मध्यम आकार के दो पेड़ |  जब पेड़ स्वयं का बलिदान देते है ,तो एक व्यक्ति की अंतिम क्रिया पूरी होती है | यानी मृत देह के साथ पेड़ भी मरते है | क्या हम इन पेड़ो का जलना नहीं बचा सकते ?  अवश्य बचा सकते है इसके लिए हमे अपनी पारम्परिक सोच को बदलना होगा तथा यह काम आपकी नई पीढ़ी ही कर सकती है | बड़े शेहरो में दाह संस्कार हेतु विधुत दाहिनी ,दिझेलदाहिनी और गैस दाहिनी का इस्तेमाल करते है |

किसी भी शहर में हम जाते है तो ऐसा देखते है की पहले श्मशान भूमि बस्ती के बाहर हुआ करती थी परन्तु शहरों के अपने बढ़ते हुआ आकार ने उसे अपने बीच लाकर रखा है | जैसे -जैसे शहर का विकास हुआ श्मशान भूमि शहर के अन्दर आ गई |

शहर का विस्तार यानी जंगल काटना ,पेड़ काटना उसके बिना तो शहर बढ़ ही नहीं सकता | इसलिए पेड़ काटने के कारन ही शहर बढ़ सका | यदि पेड़ को जगह दी गई होती तो शहर कैसे बढ़ेगा ? यह सवाल मनुष्य बार -बार पूछता रहा और अंत में उसकी विजय हुई और पेड़ काटने का सिलसिला जारी रहा |

नगरपालिकाए  श्मशान  भूमि पर अभी जितना व्यय कर रही है ,आने वाले वर्षो में उसमे निश्चित ही वृद्धि होनी है | व्यय करने में किसी को कोई भी आपति नहीं है परन्तु क्या नगरपालिकाए वृक्षारोपण जैसा काम अपने हाथ में नहीं ले सकती ? क्या प्रत्येक मृत व्यक्ति के साथ दो पेड़ जलना आवश्यक है ??  वृक्ष बचाओ ,पृथ्वी बचाओ ऐसे नारे लगाने से काम नहीं चलेगा |वृक्षों की अकाल मृत्यु कही रूकती नजर आ रही | धनवान व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसके लिए चन्दन की चिता |

एक मृत व्यक्ति के साथ कम से कम दो पेड़ो की भी मृत्यु निश्चित है |मनुष्य को जीवित रहने के लिए प्राण वायु देने वाला वृक्ष अपने फल , फुल ,पत्तिया आदि से – ओषधीय तेयार कर आरोग्य सम्पन करने वाला वृक्ष ,अपनी टहनियों पर पक्षियों का घरोंदा बनाने वाला वृक्ष , तेज धुप में शीतल छाया देने वाला वृक्ष | ऐसे में जब वृक्ष टूटता है तथा उससे जो अपूरणीय क्षति होती है , हमे विचलित क्यों नहीं करती ??

आजकल लोगो में नेत्रदान ,अंगदान और देहदान करने में जागरूकता बढ़ रही है | यदि हम सबके सामने विधुत दाहिनी ,गैस दाहिनी और डिझेल दाहिनी के पर्याय रखे तो लाखो पेड़ो को जीवन दान मिलेगा ,उसका फायदा तो मनुष्य को ही होने वाला है | जिन शहरों में ऐसी सुविधा उपलब्ध है वहां पर लोग जागरूक हो रहे है | हालंकि यह विषय बहुत ही संवेदनशील है परन्तु इस दृष्टी से विचार होना भी आवश्यक है | मृतदेह से संबधित पारम्परिक विचार बदलने की आज महती आवश्यक है |

Author Details
Blogger

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *