एहसास: एक रोमांटिक कविता

( एहसास ) तू कोई हवा का झोंका है या मेरे ख्वाबो का झरोखा, बंद निगाहों में पास होता है खुली निगाहों में न जाने कहाँ होता, महसूस करके तुझको …

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( वह ) हिंदी काव्य Hindi Poetry By कवि आलोक पान्डेय

वह हर दिन आता सोचता बडबडाता,घबडाता कभी मस्त होकर प्रफुल्लता, कोमलता से सुमधुर गाता… न भूख से ही आकुल न ही दुःख से व्याकुल महान वैचारक धैर्य का परिचायक विकट संवेदनाएँ …

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अखंड भारत की ओर Hindi Kavita

अखंड भारत की ओर —————————————- —————————————- आघातों की राहों में सुन्दर मुस्कान बढाता जा, राष्ट्रदूत हे वीर व्रती भारत को भव्य सजाता जा, सुस्थिरता को लाता जा । अगणित कर्तव्यों …

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वजूद – Motivational Hindi Poetry By Sonam Satya

वजूद इस जहान में बसने वालेतू खुद के वजूद की ऐसी बस्ती बना,जिसमें तेरी शख्शियतजमाने का नूर बन जायेखुद की ऐसी हस्ती बना,मुश्किलों की उठती लहरों मेंजो मुकाम का साहिल …

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खुदा पर कविता – Enjoy Our Famous and Latest Poem on Khuda

खुदा इस दुनियां में कुछ भीखुदा से अंजान नहीं है,उसकी कोई भी फितरतइस जहान में बेईमान नहीं है,रहमतों में उसकी वो नूर हैपल में इन्साँ खुशियों के पासपल में गमों …

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जिंदगी पर कविता- Hindi Poem on Life By Sonam Satya

 जिंदगीपल में उदास होती हैपल में खुशियां संजोती हैजिंदगी ये न जाने कैसीअजब पहेली है,कभी लगे अजनबीकभी लगे सहेली है,पल में ख्वाहिशों का मेला हैपल में हर लम्हा अकेला है,जिंदगी …

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कुंभकार A Poem on Kumbhkar in Hindi

कुंभकार       माटी से बना इंसान,       एक दिन माटी में ही है मिल जाना,       फिर भी पत्थर दिल बना जमाना,       क्यों भूला है वो खेल पुराना,       …

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बचपन के दिनों पर छोटी कविता- ( बचपन की गलियां )

( बचपन की गलियां)        नन्हें-नन्हें लड़खड़ाते कदमों से         गुजरते थे जहाँ,        घर-आंगन में अठखेलियां करते थे जहाँ,        माँ के आंचल में पिता के कांधे पर        …

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समाज पर व्यंग्य (कविता) Satire on society ( Hindi )

लोग डरते हैं समाज सेडर जो उनके अंदर फैला हैइस तरह कि उनके अपने विचारों परहावी होता है समाजवो छुपाते हैं उसेजो अप्रिय लगे सबकोजिससे उनके अस्तित्व पर कुठाराघात होचोट …

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