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स्वामी विवेकानंद के उपदेश – Swami Vivekananda Thoughts

स्वामी विवेकानंद के उपदेश –  swami vivekananda thoughts in Hindi

कायर लोग ही पापाचरण करते है , वीर पुरुष कभी पापाचरण नहीं करते है – यहाँ तक कि कभी वे मन में भी पाप का विचार नहीं लाते |

यदि भारत को महान बनना है इसका भविष्य उज्ज्वल बनाना है तो इसके लिए आवश्यकता है संगठन की और बिखरी हुए इच्छाशक्तियों को एकत्र करने की |

बुद्धिमान पुरुष वही है जो प्रत्येक कार्य को अपने लिए रुचिकर बना ले |

दुनिया तभी पवित्र हो सकती है जब हम स्वयं पवित्र और अच्छे हो |

ब्रहमाण्ड की सारी शक्तियाँ पहले से हमारी है वो हम ही है जो अपनी आखोँ पर हाथ रख लेते है और फिर रोते है की कितना अन्धकार है |

हम वो है जो हमारी सोच ने बनाया है इसलिए इस बात का ध्यान रखिये ,की आप क्या सोचते है शब्द गौण है विचार प्रमुख है वे दूर तक यात्रा करते है |

भला हम भगवान् को म खोजने कहाँ जा सके है अगर उसे अपने ह्रदय और हर एक जीवित प्राणी में नहीं देख सकते है |

कोई तुम्हे पढ़ा नही सकता ,कोई तुम्हे आध्यात्मिक नहीं बना सकता , तुमारी आत्मा ही गुरु है |

बल ही जीवन है और दुर्बलता ही मृत्यु ही |

खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है

धर्म को लेकर भी विवाद मत करो |

जब तक कोई बात स्वयं प्रत्यक्ष अनुभव न कर लो तब तक उस पर विश्वास न करो |

जो वस्तु तुम्हे पवित्र व अच्छी  लगे उसी का ध्यान करे |

आत्मा के अतिरिक्त किसी से प्रेम करने पर उसका फल शोक और दुःख ही होता है |

जिस विधार्थी को विद्या ग्रहण करनी है उसे सुख का त्याग कर देना चाहिए |

दुसरो की यदि सहायता चाहते हो तो तुम्हे अहंभाव को छोड़ना होगा |

मनुष्य न तो कभी तो मरता है न ही जन्म लेता शरीर मरते है पर वह कभी नहीं मरता है |

 

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