सौंदर्य क्या है ? What Is the Real Definition of Beauty?

By | March 17, 2018
संसार के सभी महान कार्य और महान कृतियों का सृजन एकांत में ही हुआ है इसलिए अपने जीवन में कुछ समय प्रतिदिन एकांत –चिंतन के लिए अवश्य बिताए | कितना समय व्यर्थ के बकवाद ,परनिंदा ,दोषदर्शन में नष्ट किया है ? वासना के कुचक्र में पडकर आप क्या करते रहे है ? सौन्दर्य बाहर कहाँ ढूंढ़ते फिर रहे हो ?  अपने ह्रदय को टटोलो ,जरा देखो तो सही उसमे कितना सुन्दर प्रेम का रस भरा हुआ है , अन्यथा मनुष्य है क्या ? मुट्टी भर हड्डीयों का ढांचा मात्र !

सौन्दर्य क्या है ? What Is the Real Definition of Beauty? 

सुन्दरता वह है, जिसे त्यागना संभव नहीं है जिसे तुम छोड़ न सको ,वही सुन्दर है | कुछ समय बाद जिसका त्याग कर दिया अथार्त वह सुन्दर नहीं रहा | परन्तु शुद्ध चेतन्य इसके विपरीत है ,जिसकी सुन्दरता निरंतर है | सौन्दर्य वस्तु में नही चेतना व् शक्ति में होती है | जहाँ चेतना है ,वही सुन्दरता है | चेतना के बगैर कितना भी सुन्दर कोई शरीर हो ,वह तो शव है और शव से कौन प्रेम करता है ? शव आकार और रूप में कितना भी विशाल व् भव्य हो परन्तु अब वहाँ चेतन्य नहीं है | पूर्व में उसमे कितना भी प्रेम और आकर्षण रहा हो ,परन्तु वहाँ से चेतन्य चला गया | शव के साथ कौन क्या करेगा ? उसका स्पर्श भी कोई नहीं करना चाहेगा | कहने का तात्पर्य है की कही भी सौन्दर्य का कारण चेतन्य ही तो है | आकर्षण चेतन्य का है उसके प्रति आसक्ति के कारण तुम उस पर हावी होना चाहते हो , उसके स्वामी बनना चाहते हो ,परन्तु ऐसा करते ही सुन्दरता नष्ट होकर मलिनता में परिवर्तित हो जाती है जिसके फलस्वरूप राग द्वेष ,झगड़ा –कलह आदि शुरू हो जाते है |

“फुल को देखो ,ह्रदय से उसकी सुन्दरता को समर्पित

हो जाओ ,उस पर अधिकार मत जमाओ ”

किसी वस्तु को देखने पर उस वस्तु को बनाने वाले की तरफ दृष्टी जाना बुद्धिमानी है | कुम्हार के बिना घड़ा ,चित्रकार के बिना चित्र नहीं बनता | पुत्र –पिता की परमपरा को देखे तो आखिरी पिता कौन है ? जब आप लकड़ी का बना हुआ खिलौना –हाथी देखते है और उसे हाथी मानते है | उस खिलोने ने लकड़ी रूप तत्व को ढक लिया है | उसी प्रकार मूल तत्व (परमेश्वर ) को  नाम रूपों ने ढक लिया है | यह लकड़ी है ,हाथी नहीं ! यह आत्मा है शरीर नहीं ! विश्व और उसका अस्तित्व समाप्त नही होता | केवल उसका स्वरूप ,अर्थ और महत्व बदल जाता है |

तथ्य ,तत्व और सता सदा की भांति मौलिक रूप से बने रहते है , केवल दृष्टी कोण रूपांतरित हो जाता है | विश्व में एक ही पवित्रतम मंदिर है ,जिसमे अत्यंत शक्तिशाली पूर्णता की प्रतिमा स्थित है : वह सर्वानन्द मंदिर – मानव का शरीर !

 2 total views,  1 views today

Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *