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सम्मोहन विद्या है या विज्ञान जानिए इसका रहस्य

               कला या विज्ञान सम्मोहन का जादू

सम्मोहन को जादूगरों का सबसे बड़ा हथियार माना जाता था यह किसी को किये गए जादुई प्रेम का भी प्रतीक है | इन बातो से लगता है की जैसे सम्मोहन कोई परलौकिक शक्ति हो

मगर ऐसा नहीं है , सम्मोहन यानी हिप्नोटिज्म एक पूर्ण विज्ञान है | इसके जरिये किसी की भी मानसिक अवस्था को बदला जा सकता है या उस पर मानसिक कब्जा किया जा सकता है ऐसा करके उस व्यक्ति से मनचाहा कार्य करवाया जा सकता है | किसी को अपने वश में करने के लिए सम्मोहन की कला का सदियों से प्रयोग होता रहा है | पहले लोग इसे जादू दिखाने का जरिया मानते थे जब इसका वैज्ञानिक अध्ययन हुआ तो फिर इसे एक पूर्ण विज्ञान समझने लगे |

सम्मोहन के ज्ञान और मनोविज्ञान की खोज वियना के एक डॉक्टर ए मेस्मर के द्वारा किया गई थी इसलिए इसका एक नाम मेस्मेरिज्म भी है सम्मोहन शब्द का प्रयोग सबसे पहले १८४० में स्कौट लैंड  के एक सर्जन जेम्स ब्रेड ने किया था | इस शब्द की उत्पति ग्रीक भाषा के शब्द हिप्नोस से हुई , जिसका अर्थ  – नींद में होना या अर्धचेतन अवस्था में होना | यही कारण है की जो व्यक्ति सम्मोहन की अवस्था में होता है वह उनींदा दिखता है| सम्मोहन के प्रभाव में मष्तिष्क कुछ इस तरह बदल जाता है की प्रभावित व्यक्ति को जो भी आदेश दिया जाता है ,वह उसका पालन करता है बशर्ते यह है की आदेश उस व्यक्ति ने दिया हो जिसके वह प्रभाव में है |

सम्मोहन का प्रभाव लोगो पर पूर्णता में  पड़ता है और आंशिक रूप में भी | किस पर कैसा प्रभाव पड़ता है यह सम्मोहित व्यक्ति की मानसिक शक्ति पर निर्भर करता है |

सम्मोहन का किसी पर प्रयोग तभी किया जाना चाहिए जब प्रभावित होने वाला व्यक्ति अपनी स्वीकृति दे | लेकिन आजकल तमाम लोग इस तरह की मर्यादा को तोड़ते है और ऐसे लोगो पर सम्मोहन का प्रयोग करते है जो नहीं चाहते है की उन पर किया जाए |

सम्मोहन के प्रयोग किये जाने की एक प्रक्रिया है ,उसी प्रक्रिया के तहत इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए जब कोई व्यक्ति किसी पर सम्मोहन करता है तो वह उस व्यक्ति से जिस पर सम्मोहन किया जा रहा है , बारबार किसी एक जगह पर ध्यान केन्द्रित करने को कहता है | यह एक जगह कुछ भी हो सकती है जैसे – धातु का एक टुकड़ा , पेंडुलम करता कोई पेंडेंट , क्रिस्टल बाल या इसी तरह की कोई चमकदार वस्तु जिस पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए थोड़ी मशक्कत करनी पड़े |

जब कोई सम्मोहित किया जाने वाल व्यक्ति बार-बार किसी एक जगह पर अपन ध्यान को केन्द्रित करके रखता है तो धीरे –धीरे वह सम्मोहित होने लगता है उसकी आँखे थकने लगती है | सम्मोहक व्यक्ति जब यह देखता है उस व्यक्ति पर असर हो रहा है तो सम्मोहक उसे आँखे बंद करने को कहता है ऐसी अवस्था में सम्मोहित होने वाला व्यक्ति सोने की अवस्था में आ जाता है जब सम्मोहक को यह लगता है की वह जिसे सम्मोहित कर रहा है वह सोने की अवस्था में पहुँच रहा है तो वह उसे आदेश देना शुरू करता है | यही वह क्षण होता है जब सम्मोहक के आदेशानुसार सम्मोहित होने वाला व्यक्ति उन आदेशो का पालन करने लगता है |

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