Write For UsPublish Your Blogs For FREE!

वासना की नजर… The Best Hindi Poetry

वासना की नजर….

वासना हैं तुम्हारे नजर में तो मैं क्या क्या ढकुं,
तु हि बता क्या करूँ कि चैन कि जिन्दगी जी सकूँ,
साड़ी पहनती हूँ तो तुझे मेरी कमर दिखती हैं, 
चलती हूँ तो मेरे लचक पर ऊंगली उठती हैं,
दुपट्टे को क्या शरीर पर नाप कर लगाऊँ,
समझ में नहीं आता कैसे अपने शरीर कि संरचना को तुमसे
छुपाऊं,
पीठ दिख जाएँ तो वो भी काम निशानी हैं,
क्या क्या छुपाऊं तुमसे मेरी हर एक अंग देखकर तुम्हारी बहकती जवानी हैं,




घाघरा चोली पहन लो तो स्तनों पर तुम्हारी नजर टिकती हैं,
पीछे से मेरे नितंवो पर तेरी आंखे टिकती हैं,
केश खोल के रख लूँ तो वो भी बेहयाई हैं,
क्या करें तु भी तेरी निगाहों में समाई कम परछाई हैं,
हाथों को कंगन से ढंक लूँ चेहरे पर घुंघट का परदा रख लूँ,
किसी कि जागिर हूँ दिखने के लिए अपनी मांग भर लूँ,
पर तुम्हें क्या परवाह मैं किसी कि बेटी किसी कि पत्नी और किसी कि बहन हूँ,
तुम्हारे लिए तो सिर्फ़ तुम्हारे वासना को मिलने वाली चैन हूँ,
सिर से पांव के नख तक को छुपालूंगी तो भी कुछ नहीं बदलने वाला,
तेरी वासना का भूजंग तो हमें नया बहाना करके हमें डंस लेगा..!!

Author Details
Blogger

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *