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भारत के ऐसे 5 राज्य जहां श्री राम की नहीं बल्कि रावण की होती है पूजा

राम नाम का जाप करने से ही लोगों को अद्भुत शांति प्राप्त होती है। श्री राम भगवान को मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहा था क्योंकि इन्होंने अपने पिता के वचन का पालन करवाने के लिए 14 वर्ष का वनवास झेला था। भारत में हर साल रामनवमी और दशहरा मनाया जाता है। दशहरे के दिन रावण का पुतला जलाया जाता है परंतु भारत में ही कुछ जगह ऐसी है जहां पर रावण की पूजा भी होती है। आज हम आपको उन जगह के बारे में बताएंगे तो चलिए बिना देरी करते हुए चलते हैं मुख्य मुद्दे पर।

मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के नटरेन तालुका मे रावण गांव नामक आया है। इस जगह पर रावण बाबा का मंदिर है और यहां रावण की पूजा की जाती है। यह रावण का मध्य प्रदेश में पहला मंदिर है।

• मध्य प्रदेश के ही मंदसौर जिला में भी रावण की पूजा की जाती है। मंदसौर नगर के खानपुरा विस्तार में रावण रूडी नाम के स्थल पर रावण की विशाल मूर्ति है। कथा के अनुसार रावण दशपुर (मंदसौर) का दामाद था। रावण की धर्मपत्नी मंदोदरी मंदसौर की निवासी थी। मंदोदरी के कारण दशपुर का नाम मंदसौर माना गया।

• कर्नाटक के कोलार जिले में लोग खेती की उपज के समय मनाए जाने वाले उत्सव में रावण की पूजा करते हैं। इस अवसर पर जुलूस भी निकाला जाता है। यहां पर लोग रावण की पूजा इसलिए करते हैं क्योंकि रावण भगवान शिव का परम भक्त था। लंकेश्वर महोत्सव में भगवान शिव जी के साथ रावण का जुलूस निकाला जाता है। इस राज्य के मालबल्ली तालुका में  रावण का एक मंदिर भी है।

• उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में रावण का एक बहुत ही प्रसिद्ध दशानन मंदिर है। कानपुर के शिवाला विस्तार के दशानन मंदिर में शक्ति के प्रतीक के रूप में रावण की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1890 में हुआ था। रावण के इस मंदिर को साल भर में सिर्फ दशहरा के दिन ही खोला जाता है। परंपरा के अनुसार दशहरा के दिन सुबह रावण का मंदिर खोला जाता है और रावण का श्रृंगार करके इनकी पूजा की जाती है।

• राजस्थान के जोधपुर  जिला के मंदोदरी नाम के विस्तार को रावण और मंदोदरी के विवाह का स्थल माना जाता है। जोधपुर में रावण और मंदोदरी  के शादी के स्थल पर आज भी  रावण की चवरी  नामक एक छतरी है। शहर के चांदपोल विस्तार में रावण का मंदिर भी बनाया गया है।

• हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में शिवनगरी के नाम से प्रख्यात बैजनाथ नाम का कस्बा है। जहां लोग रावण के पुतले को जलाना महापाप मानते हैं। यहां पर रावण की पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की जाती है।  मान्यता के अनुसार यहां पर रावण ने कई वर्षों तक भगवान शिव की तपस्या की थी और मोक्ष का वरदान प्राप्त किया था।

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