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बिटिया पर कविता – Hindi Poem on Daughter

बिटिया

अपने दिल के टुकड़े  को

कैसे फिर से  जोड़ूँ

बिटिया को कैसे बचपन मोड़ूँ

पलकों पर बैठी ,हथेली पर पांव रखे

ऐसे बाप को कैसे चुप करा दूँ

इक अश्क न गिरने दिया आँखों से

उन मोतियों को पलकों में ही संजो  दूँ

बिटिया को कैसे बचपन मोड़ूँ

जिसकी चाहत को अनकहा सुन लिया

जिद्द करने से पहले पूरा कर दिया

                                                                उन चाहतो को आज पूरा कर दूँ

बिटिया को कैसे बचपन मोड़ूँ

गलती भी मेरी तुझ पर हक जता बैठा

कर्ज था देना ,इक जमीदार बन बैठा

आ , उस कर्जे को चुकता कर दूँ

तुझे दुल्हन बना कर विदा मैं कर दूँ

बिटिया को कैसे बचपन मोड़ूँ

अब हाथ जोड़कर खड़े होने की आई बारी

इज्जत की पगड़ी तेरे सिर से वारुँ

बिटिया को कैसे बचपन मोड़ूँ

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