Write For UsPublish Your Blogs For FREE!

नारी अबला नहीं सबला है Hindi essay on Nari

नारी अबला नहीं सबला है-

सदियों से जीवन के हर दौर में समाज की हर गतिविधि में स्त्रियों का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है, और आज के प्रतिस्पर्धा युग में महिलाओं का पुरुषों के बराबर आना हमारे समाज की नींव को मजबूत कर रहा है।

मगर आज भी हमारे देश में जहां लड़कियों के पैदा होने पर उन्हें मार दिया जाता है, व उन पर अत्याचार किया जाता है, ऐसे वर्ग के समाज में कभी उन्नति नहीं हो सकती, क्योंकि जहां नींव को ही खोखला किया जा रहा है, वहां हरे भरे जीवन के बारे में कैसे सोचा जा सकता है। ऐसे समाज की गलत सोच को तभी बदला जा सकता है, जब वहां की महिलायें खुद ही द्रढ़ प्रतिग्य होकर आत्मनिर्भर बनने की कोशिश करें।

स्त्रियां बड़ी सहजता से खुद को हर रूप में ढालकर रिश्तों की मर्यादाओं के बीच अपने जीवन के साथ कई जीवन की संवाहक होती हैं, और आज के दौर में महिलाओं का जीवन शादी करके सिर्फ अपने घर-परिवार संभालने तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वो अपने परिवार के सहयोग व अपनी काबिलियत से इस समाज को इस देश की बागडोर संभालने में भी कायम हैं।

वहीं घरेलू महिलायें भी अपनी सम्पूर्ण जिम्मेदारी से अपना घर-परिवार संभालते हुए सभी के कामयाब जीवन का संचालन करती हैं, इसलिए कहते हैं कि हर कामयाब व्यक्ति के पीछे कोई न कोई स्त्री का हाथ जरूर होता है।

नारी शक्ति एक ऐसी अहम शक्ति है, जिसे अगर निश्छल प्यार व पूर्ण विश्वास का सम्मान दिया जाये तो वो सार्थक जीवन का प्रतीक बन जाती है, क्योंकि नारी शक्ति से ही जीवन की उत्पत्ति है और वही हर पल जीवन की सरंच्छक भी है। इसलिए.. नारी अबला नहीं सबला है।

Author Details
Blogger

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *