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धर्म- दुनिया का सबसे विवादित मुद्दा

धर्म- दुनिया का सबसे विवादित मुद्दा

किसी ने कहा हैं कि अगर इस जहाँ में धर्म औऱ जातियाँ न होती तो ये दुनिया और भी खूबसूरत होती।
परन्तु इस जहां में जिन महापुरुषों ने धर्म से सम्बंधित सिद्धान्त बनाये उनका उद्देश्य केवल विश्व का कल्याण करना था,न कि धर्म की आड़ लेकर मनुष्यता का विनाश करना।
इस दुनिया के सृष्टिकर्ता का न कोई धर्म है और न ही कोई जाति।एक आम इंसान अपने पूरे जीवन काल में ये भी नहीँ समझ पाता कि ईश्वर कौन हैं,अल्लाह कौन हैं,गॉड कौन हैं।जिस आम इंसान को ये भी नही पता कि वास्तविक धर्म और अधर्म क्या हैं? जो इंसान स्वयं का उद्द्वार नही कर सकता ,वह भला कैसे इस विश्व का कल्याण कर सकता हैं?
महापुरुषों ने जितने भी पवित्र ग्रन्थ हमको दिए हैं,चाहे वो गीता हो,कुरान हो,बाइबिल हो,धम्मपद हो या गुरुग्रन्थ साहिब हो, इन सबका उद्देश्य था विश्व में शांति स्थापित करना एवम विश्व का कल्याण करना।
परन्तु आज ऐसे-ऐसे लोग धर्म की आड़ लेकर मानवता एवम मनुष्यता का नाश करने पर तुले हुए हैं,जिन्होनें आजतक कभी भी इन पवित्र ग्रन्थो को स्पर्श भी नही किया और न ही यह जानने का प्रयास किया कि आखिर धर्म और अधर्म होता क्या हैं।
इस दुनिया का वास्तविक मज़हब हैं इंसानियत। अगर हम स्वयं को एक इंसान मानकर प्रत्येक धार्मिक पुस्तक का अध्ययन करेंगे तो हमें पता चलेगा कि सब धर्मों का एक ही सार हैं। सब धर्म मिलकर एक ही सन्देश देना चाहते हैं कि एक सच्चे और अच्छे इंसान बनो।
किसी भी धर्म ने आजतक हमें कोई भी गलत शिक्षा नही दी।जब लोग सच्चे दिल से अपने धर्म का अध्ययन करते हैं तो वो खुद को बहुत ताकतवर मानते हैं,लेकिन कल्पना कीजिये यदि सिर्फ एक धर्म से हमें इतनी ताकत मिलती हैं तो सोचो अगर सभी धर्मों का सार यदि हमने जान लिया तो हमारी ताकत कितनी गुणा बढ़ जाएगी।परन्तु आज का भर्मित इंसान बेचारा सही और गलत में भी फर्क नही कर पाता ,धर्म के बारे में जानना तो बहुत दूर की बात हैं।
आज हमारे देश भारत में ऐसे-ऐसे मुद्दो पर बहस होती हैं जिन मुद्दों का कोई मतलब ही नही।जिस देश में आधी से ज़्यादा जनता गरीबी में जूझ रही हो,भला वो धर्म के बारे में क्यूँ जानेगी।
ज़ाहिर सी बात हैं,अगर कोई व्यक्ति भूख से मर जा रहा हैं और एक तरफ हम उसे खाना परोसे और दूसरी तरफ कोई धार्मिक पुस्तक पढ़ने के लिए दे तो पहले वो अपनी भूख ही शांत करेगा,न कि उस पुस्तक को पढ़ेगा।
इस विश्व का सच्चा धर्म हैं,इंसानियत।अगर हमारे अंदर करुणा और दया नही हैं।हम किसी के दुःख-दर्द का अनुभव नहीं कर सकते,किसी लाचार की मदद नही कर सकते हैं,तो चाहे कितनी भी धार्मिक पुस्तकें क्यों न पड़ लें या कितनी भी बहस क्यों न कर लें,वो हमारे किसी काम की नही है।
आजतक किसी भी महापुरुष ने हमें गलत शिक्षा नही दी। श्री कृष्ण ने हमें सही और गलत का ज्ञान दिया तो मोहम्मद पैगम्बर साहब ने हमें भाइचारे से रहना सिखाया।महावीर स्वामी जी ने हमें अहिंसा का पाठ पढ़ाया तो वहीं महात्मा बुद्ध ने हमें शांति से रहना सिखलाया।ईसा मसीह ने हमें प्रेम करना सिखाया तो वही गुरु गोविंद सिंह ने हमें आनन्द से जीवन जीना सिखाया।
सच्चे दिल से यदि हम सब महापुरुषों का अध्ययन करेंगे तो हमारा मन ही मंदिर बन जायेगा।फिर कहाँ जरूरत ईश्वर को ढूंढने की।जब मन करे आंखे बंद करके कर लो दर्शन अपने भगवान,अल्लाह,ईश्वर और गॉड के।
आजकल जब हम सोशल मीडिया पर देखते हैं तो वास्तविक जिंदगी में कहीं अधिक शांति दिखाई पड़ती हैं।जो इंसान खुद को तो सुधार नही सकते वो सोशल मीडिया पर महापुरुष बन के ज्ञान बांट रहे हैं। और उपदेश तो ऐसे देते हैं जैसे कोई भगवान का अवतार लेके आये हैं और अब इस दुनिया को बदल के रहेगे।जो इंसान स्वयं को नही बदल सकता, स्वयं का उद्धार नही कर सकता,वह विश्व का कल्याण कैसे करेगा?
हो सकता हैं मेरी कुछ बातों से,कुछ लोगो के दिलो को ठेस लगी हो ये वही लोग होंगे जिन्होने आजतक कभी भी धर्म को जानने की कोशिश ही नही की।
मेरी उन सभी लोगो से जो इस दुनिया को बदलना चाहते हैं,विनती हैं कि पहले आप स्वयं को बदल लें।शायद आपके उदाहरण से ये दुनिया बदल जाये।
आपने इस पोस्ट को पढ़ने के लिए अपना अमूल्य समय दिया,उसके लिए बहुत-बहुत शुक्रिया।

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