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दिव्यांगों को सहानुभूति नहीं, सहयोग की जरूरत है Best Hindi Essay on Humanity

( सहानुभूति नहीं सहयोग चाहिए)

जब कोई इंसान किसी तरह की शारीरिक अक्षमता से ग्रस्त होता है, तो उसकी यह पीड़ा केवल उसके शरीर तक सिमित नही रहती. हर रोज के छोटे-छोटे कार्य भी ऐसे इंसान के लिए किसी युद्ध की तरह कठिन हो जाते हैं.  ऐसे हालात में आसपास के लोगों का कड़वा व्यवहार बार-बार ऐसे लोगों का मनोबल तोड़ने की कोशिश करता है, ऐसे में जिनकी मानसिक परिस्थति भी कमजोर होती है वो लोग अपने जीवन से हार मान बैठते हैं और उनकी ज़िन्दगी सच में एक बोझ बनकर रह जाती है, और जो मानसिक रूप से द्रण होते हैं वो पूरी हिम्मत के साथ प्रतिकूल स्थतियों का सामना करते हुए अपनी ज़िन्दगी को एक ऊँचा मुकाम देते हैं और हमारे समाज के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बनते हैं…

* ऐसे लोगों को हमारे समाज में किसी भी तरह से अलग और कम न समझे… इसके लिए हमारी ज़िम्मेदारी बनती है की हम कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें…

* सार्वजानिक स्थलों पर अगर आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति हो तो उसकी सहायता के लिए सदैव तत्पर रहें.

* ऐसे लोगों की मदद करते समय अपने व्यव्हार से उन्हें इस बात का जरा भी एहसास न होने दें की वे लाचार हैं, ऐसे लोगों से अनावश्यक सहानुभूति न दिखाएँ, ऐसा करने से उनके मन में हीनभावना पैदा होती है.

* दिव्यांग लोगों के साथ बातचीत करने के दौरान उनकी अक्षमता का ज़िक्र करने से बचें.

* अपने बच्चों को छोटी उम्र से ही यह समझायें की कुछ लोगों में जन्मजात रूप से शारीरिक या मानसिक दुर्बलताएँ होती हैं, इसलिए हमे उनसे सहानुभूति न दिखाते हुए बल्कि उनका सहयोग करना चाहिए.

* किसी भी ऐसी बातचीत या जोक्स में शामिल न हों, जिससे ऐसे लोगो का मजाक उड़ाया जा रहा हो,बल्कि ऐसा करने वालों को समझाने की कोशिश करें की यह अनुचित है.

* और सबसे महत्वपूर्ण बात की, हमे कभी यह नही सोचना चाहिए की ये लोग किसी भी तरह से हमसे कम हैं, क्योंकि ज्यादातर ऐसे लोगों के हौसले इतने बुलंद होते हैं की ये हम आम इंसानों से भी बढ़कर इतना कुछ ख़ास कर जाते हैं की हम नार्मल लोग भी इनके आगे कम लगते हैं.

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