ज़िन्दगी – जादू की पुडिया ? Zindgi – Jadu Ki Pudiya

By | September 11, 2018




पल पल पल जाने किस पल ,

ख़ुशी हो या फिर ग़म

सबी को बीत जाना है वक़्त के साथ,

जो भी होना है वही होता है,

जो भी सहना है सहना ही है,

जो बीतना हो वही बीतेगा,

ना क़ुछ है किसी के बस में,

जो भी है वो है ‘ ये पल ‘ ।


बीते पल तो बीत गए,

कभी वापस ना आने के लिए,

ना लौटने वाले पलों को क्यों सोचे है मन?

जाने ये ज़िन्दगी है किस चिड़िया का नाम?

लागे है कोई जादू की पुडिया,

जो किसी को समज ना आये,

कोई बस मे ना कर पाए।


बीते हुए पल तो बीते हुए पल है,

वापस जुटला नही सकते ,

वक़्त को मोड़ नही सकते ,

जो बीत गयी सो बात गयी,

जीना तो हमे इसी पल मे है,

पल पल बदले है पल ।


लागे है कोई जादू की पुड़िया,

ज़िन्दगी है किस चिड़िया का नाम?


छोठी छोठी ख़ुशियों के इन्तज़ार मे,

तरस कर रेह गयी ये आँखे,

फिर भी मायूस हो कर नही थके,

शायद ज़िन्दगी बर रहे इसी इन्तज़ार मे???


ज़िन्दगी ऐ ज़िन्दगी , जाने क्या है ज़िन्दगी ???

लागे है कोई जादू की पुदिया?

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