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कैसे लाएँ जीवन में खुशी How to Be Happy In Life

आम तौर पर लोग नहीं जानते कि ख़ुशी क्या है ? ढेर सारे पैसे , ऐशोआराम होते हुए भी आज लोग खुश नहीं होते ,जबकि कुछ लोग ऐसे भी है ,जिनके पास कुछ नही होता ,फिर भी वे खुश रहते है ,सच तो यह है कि ख़ुशी कही बाहर नहीं मिलती ,बल्कि हमारे अंदर हर समय मोजुद रहती है जिसे हम देख नहीं सकते ,पर महसूस कर सकते है |

एक मनोवैज्ञानिक पीट कोहेन के अनुसार – वे लोग सबसे ज्यादा दुखी रहते है ,जो नकारात्मक चीजो पर ज्यादा ध्यान देते है जैसे – जीवन में क्या क्या गलत है या उन्हें किया नहीं मिल पाया है | इसके विपरीत वे लोग कम से कम में भी सुखी है जिन्हें जो कुछ भी मिला है ,वे उसी से संतुष्ट है | मनोवैज्ञानिक के अनुसार , नकारात्मक तत्व हमारे जीवन में दुःख ,असंतोष व् अशांति का संचार करते है ,जबकि सकरात्मक तत्व हमे आंतरिक खुशी ,संतोष व् शांति देते है |

ख़ुशी बाजार में मिलने वाली कोई वस्तु नहीं ,जिसे पैसे देकर ख़रीदा जा सके | इसका कोई आकार नहीं होता और न ही इसे चुराया जा सकता है | खुशी छोटी या बड़ी नहीं होती और नहीं ये बड़ी चीजो को हासिल करने से बनी रहती है यह तो जिन्दगी की छोटी छोटी चीजो से हमे मिलती रहती है बस ,हमे उन्हें देखने ,समझने का तरीका आना चाहिए |

सच तो यह है की जीवन में बड़ी उपलब्धि व् बड़ी ख़ुशी पाने के लिए हम छोटी छोटी खुशियों की निरर्थक बलि देते रहते है और इस तरह न तो हम वर्तमान में खुश रह पाते है और न हीं भविष्य को सुखद कर पाते है | इसका कारण यह भी है की निरंतर नकारात्मक चिंतन से और इस सोच से की जो हमे मिला है ,वह कम है हमारा स्वभाव ही कुछ इस तरह से बन जाता है की हम जाने अनजाने मिलने वाली इस खुशियों की परवाह ही नहीं करते और हमेशा दुखी रहने को अपना स्वभाव बना लेते है |

ख़ुशी तो देने की चीज है , जिसे जितना बांटो ,वह उतना ही बढती है | यह जितना चाहो ,उतनी मिल सकती है ,बस ,हमे केवल इसे देखने व् समझने का नजरिया बदलने की जरूरत है | अब आपके मन में यह सवाल उठ होगा की इस दृष्टीकोण को कैसे बदला जाए ? कुछ ऐसे सरल उपाय आपको बतायेंगे जिन्हें अपनाकर आप न केवल अपने नकारात्मक नजरिया बदल सकते है ,बल्कि स्वयं को भी हमेशा खुश भी रख सकते है |

ऐसा ही एक उपाय है की आप हमेशा अपने आप से प्रेम करे जब हम खुद से प्रेम या पसंद करते करते है, तभी ही दुसरो से प्रेम कर पाने में और उन्हें आत्मीयता दे पाने में समर्थ हो पाते है |

जो स्वयं से असंतुष्ट होते है और सदा अपने व्यक्तित्व में कमियाँ देखते रहते है ,उनके आत्मविश्वास में कमी बनी रहती है और वे दुसरो का भी प्रोत्साहन नहीं कर पाते | उनकी असुरक्षा उन्हें दुसरो को भी सुरक्षा देने में नाकामयाब रहती है |

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इस कमी को दूर करने का एक अच्छा उपाय यह है की हम नियमित अपनी डायरी में कम से कम एक सत्य सकारात्मक घटना अपने विषय में लिखे | ऐसा करने के लिए हमे अपनी खामिया को न देखकर अपनी खुबियो पर ध्यान केन्द्रित करना होगा तथा सत्य लिखने की आदत हमे ऐसा कर्म करने के लिए प्रेरित भी करेगी |

परमात्मा ने हर मनुष्य को कोई न कोई ख़ास गुण दिया है , जिसे हम पहचाने ,खोजे और निखारने का अभ्यास करे | हर व्यक्ति अपने आप में विलक्षण व् खास है और परमात्मा ने उसके जैसा दुनिया में किसी और को नहीं बनाया है | इसलिए अगर हम यही दृष्टीकोण रख कर अपने व्यक्तित्व की विशेषताओं पर ध्यान देते हुए उनको विकसित करने का प्रयास करे तो धीरे –धीरे व्यक्तित्व ऐसी अनगिनत विशेषताओं से परिपूर्ण हो जाता है और हम अपनी एक अलग ही पह्चान बना पाने में भी सफल हो जाते है

सकारात्मक दृष्टीकोण  रखने का एक और उपाय यह भी है की जिन कार्यो को अतीत में नहीं किया जा सका ,उन्हें हम वर्तमान में करने का प्रयास करे और इस तरह प्राप्त उपलब्धियो से हमारे आत्मविश्वास में बढोतरी होगी |

जीवन की खुशियों को बढ़ाने का मूल मन्त्र है हमारे सुख बांटने में ही हमारी ख़ुशी छिपी है और यदि हम इसे छिपाकर रखते है तो यह कभी भी विकसित नहीं पाती और दुसरो के दुःख को बांटने से एक तो उनका दुःख कम होता है और दूसरा इस परोपकार से हमे आतंरिक संतुष्टि मिलती है ,जिसकी सुगन्ध वायु में फैलती है और सभी को आनंदित करती है |

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