कब कहा मैंने ज़माना चाहता हूँ Hindi Ghazal By Imran Pathan

By | June 14, 2018

कब कहा मैंने ज़माना चाहता हूँ..
होठों पर तेरा फ़साना चाहता हूँ..

ज़िन्दगी तन्हा गुज़रती जा रही है..
तुझसे अब मैं दिल लगाना चाहता हूँ..

टूट जाते हैं वफ़ा के नाम पर क्यूँ..
अपने दिल को आजमाना चाहता हूँ..

छाई है रुत पलकों पे मेरी ग़मों की..
ख्वाबों का मौसम सुहाना चाहता हूँ..

आंधियों के खौफ़ को दिल से हटा कर.
मैं दिया फ़िर से जलाना चाहता हूँ..

भूल कर तस्वीर रंजो ग़म की अपनी..
संग तेरे मुस्कुराना चाहता हूँ..

हो मुकम्मल ये ग़ज़ल पाकर तुम्हें अब..
ज़िन्दगी इक शायराना चाहता हूँ..

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