अगर चाहते हैं जीवन में सुख-शांति, तो ये उपाय आपके लिए हो सकते हैं कारगर

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खुशियाँ यदि तलाशनी है तो अपनेपन में तलाशिए ,स्वस्थ जीवन के आनन्द में तलाशिए ,दुसरो को खुशी देने में तलाशिए | जो खुशियो को दौलत कमाने या पाने में तलाशते है उनकी तलाश हमेशा  अधूरी व् अपूर्ण होती है | वे बहुत कुछ पाकर भी खाली हाथ रह जाते है |


हमारे देश की आधे से अधिक लोग ऐसे है जो दिन रात पैसा कमाने के लिए संघर्ष करते है | अधिकांश लोगो के पास रहने के लिए घर नहीं , किराये पर रहते है ,कई लोग ऐसे है जो झुग्गी झोपड़ियो में रहते है और किसी तरह अपना गुजारा करते है | सभी को यह लगता है की इस दुनिया में यदि सुख से जीना है तो इसके लिए बहुत सारा पैसा होना जरुरी है | दुनिया में यदि यश कमाना है , शोहरत कमाना है तो भी ऐसा लगता है की पैसा होना जरुरी है और यह सच भी है कीबिना पैसे के आदमी दो वक्त का खाना भी नहीं खा सकता | इसलिए पैसा हमारी जीविका के लिए एक अनिवार्य हिस्सा है ,लेकिन यदि यह सोचा जाए की पैसे के साथ हमारे जीवन की सारी खुशियाँ जुडी है तो यह अधुरा सच है |

“दौलत और शोहरत का सच यही है की इससे मनुष्य के अहं को संतुष्टि मिलती है , परन्तु इससे मिलने वाला सुख अस्थाई होता है इससे केवल भौतिक सुख उपलब्ध किये जा सकते है और ये सच्ची खुशी नहीं दे सकती | सच्ची खुशी के लिए और खुशहाल जीवन के लिए जरुरी है – सुकून और शांति | इसलिए हमारे जीवन में धन को संचित करने की एक सीमा होनी चाहिए जरुरुत से ज्यादा कमाना और उसे ग्रहण करना व्यक्ति को कभी खुशहाल नही बना सकता  ”

यह कहना है थर्मेक्स लिमिटेड की पूर्व चेयरमैन अनु आगा का , जिन्हें फोबर्स पत्रिका ने भारत की आठ सबसे रईस महिलाओं में शामिल किया और वर्ष 2010 में इन्हें पद्मश्री अवार्ड से भी सम्मानित किया गया |

इनके जीवन के अनुभव है की जीवन की असली खुशियाँ हमे छोटी –छोटी चीजो में मिलती है , जैसे शरीर को स्वस्थ रखना , ध्यान –योग का नियमित अभ्यास करना आदि | इसके अतिरिक्त ये कहती है की जीवन में रिश्ते बहुत अहम होते है और इन्हें अहमियत देने से मन को सुकून मिलता है यह सुख और सुकून किसी और चीज से मिलना मुश्किल है और इसकी तुलना में भौतिक उपलब्धियां भी निरर्थक साबित होती है |

इनका मानना है की सहज जीवन के लिए सुख –सुविधाओ का होना जरुरी है ,किन्तु उन सुविधाओ पर पूरी तरह निर्भर होना ठीक नहीं है | पहले इनकी यह सोच थी की एक अच्छा जीवन जीने के लिए ढेर सारा पैसा होना चाहिए ,लेकिन आज ये सोचती है की खुशहाल जीवन का बैंक बैलेंस से कोई लेना देना नहीं है | खूब पैसा जमा करके व्यक्ति निश्चिंत जीवन नहीं जी सकता | खुद को खुश रखने के लिए अनियंत्रित उपभोग करना ठीक नहीं है और हमे यह फैसला करना होगा की हम कितना उपभोग करे और कितना जमा करे |

हमारे जीवन में नियति का भी अहम रोल होता है , कुछ जीवन हम अपनी मर्जी से जीते है तो कुछ नियति की मर्जी से | अनु आगा के जीवन में एक समय ऐसा भी आया , जब उन्हें बहुत दुःख का सामना करना पड़ा | उन दिनो वे ब्रिटेन में अपनी बेटी के साथ थी और छह महीने के बाद घर वापिस आ रही थी | उनके लौटने की खबर पाकर उनके पति बहुत खुश थे और उन्हें लेने जाने के लिए खुद पुणे से मुंबई पहुँचने वाले थे , लेकिन एयरपोर्ट पहुँचने से पहले ही उनकी मौत हो गई | इसके एक वर्ष बाद अचानक एक दिन उनके बेटे की दुर्घटना में मृत्यु हो गई | उस समय उनके बेटे की उम्र मात्र २५ वर्ष थी |

अनु आगा का कहना है की तब उन्हें अनुभव हुआ की दुनिया की सारी दौलत देकर भी वे अपने पति और पुत्र को वापस नहीं पा सकती और इसलिए वे कहती है की मात्र भौतिक सुविधाओ के आधार पर जीवन में सुख की प्राप्ति की कल्पना करना बेहिमानी है असली सुख तो जीवन में मिली आत्मीयता और अपनेपन से ही मिलता है

इस दुनिया में दुःख कितना ही गहरा हो ,असफलता का दर्द कितना भी क्यों न हो , लेकिन समय उन घावो को ऐसे भरता है की मनुष्य फिर से अपने जीवन को नए सिरे से जने की कोशिश करता है | अनु आगा ने भी ऐसा ही किया , उन्होंने ६२ साल की उम्र में स्वयं को कंपनी की जिम्मेदारीयो से अलग कर लिया और अपना पूरा जीवन समाज –सेवा के लिए समरपित कर दिया | क्योंकि उनका बेटा हमेशा यही कहता था की हमे अपने पैसे और समय का इस्तेमाल दुसरो की मदद के लिए करना चाहिए और आज उन्हें इस बात पर बहुत संतोष है की वे अपने बेटे की खवाहिश पूरी करने की कोशिश करने में लगी है | किसी समय की प्रशिद्ध उधोगपति अनु आगा आज ‘टीच फॉर इंडिया ’ नामक संस्था की निदेशक है और जनोपयोगी कार्यो के लिए समरपित है

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